सोमवार, 18 सितंबर 2017

सूर्य यंत्र

सूर्य ग्रह प्रतीक यंत्र माना है। तथा सूर्य आत्मा का कारक होता है। करियर की उन्नति के लिए, राजकीय मान-सम्मान की प्राप्ति के लिए सूर्य का कुंडली में अनुकूल होना बेहद जरूरी है। किसी की पत्रिका में सूर्य प्रतिकूल हो तो हर कार्य में असफलता नजर आती है। ऐसी स्थिति में सूर्य यंत्र की प्रतिष्ठा कर धारण करने या पूजन करने से सूर्य का शीघ्र ही सकारात्मक फल प्राप्त होने लगता है।पंडित एन. एम. श्रीमाली जी के अनुसार पौष मास के रविवार को अत्यधिक महत्व माना जाता है। सूर्य देवता की शक्ति दोनों "आध्यात्मिक और सांसारिक" अंधेरे को दूर करती है। सूर्य देवता की पूजा अपने घर के मंदिर में की जाती है।  



सूर्य यंत्र के प्रकार :- 

सूर्य यंत्र दो प्रकार के होते हैं। प्रथम नवग्रहों का एक ही यंत्र होता है और दूसरा नवग्रहों का अलग-अलग पूजन यंत्र होता है। दोनों यंत्रों के एक जैसे ही लाभ होते हैं। 


पूजन कैसे करें :- 

सूर्य देव को प्रसन्न करने के लिए सूर्य यंत्र को सम्मुख रखकर विष्णु भगवान का पूजन या हरिवंश पुराण की कथा का आयोजन करना चाहिए। पौष मास के रविवार को बिना नमक का भोजन ग्रहण करना चाहिए। विधान के अनुसार उस दिन सुबह से ही मुंह जूठा ना करें। ठीक बारह बजे जब सूर्य देवता शीर्ष पर हों तब शुद्ध ताजे बने चावल पर दूध डालें। उस पर आधा चम्मच शुद्ध घी डालें, सबसे ऊपर शकर रखें। इस भोग को सूर्य देवता को अर्पित करें। बाद में सूर्य यंत्र की पूजन के पश्चात इसे स्वयं ग्रहण करें। सूर्य यंत्र किसी भी बढ़ती चंद्रमा रविवार को आप अपने पूजा घर में स्थापित कर सकते है। 



सूर्य यंत्र से लाभ :-

इस यंत्र की पूजा से सूर्य ग्रह का शुभ फल प्राप्त होता है तथा अनिष्ट फल की शांति होती है। जिन लोगों की जन्म पत्रिका में सूर्य ग्रह कमजोर स्थिति में हो उनको सूर्य यंत्र की पूजा, उपासना से अवश्य लाभ होता है। इस यंत्र को सामने रखकर नवग्रहों की उपासना करने से सभी प्रकार की आपदाएं नष्ट होती हैं। तथा आरोग्य प्राप्त होता है। व्यापार आदि में सफलता मिलती है। समाज में यश-पद-प्रतिष्ठा-प्रगति प्राप्त होती है। शुभ कार्यों में किसी भी प्रकार की बाधा नहीं आती है। सूर्य यंत्र के उपयोग के द्वारा शत्रुओं पर विजय प्राप्त की जाती है, इस यन्त्र की सहायता से सूर्य के हानिकारक प्रभावों को दूर किया जा सकता है।



पीड़ित सूर्य के उपाय :-

कुंडली में यदि सूर्य ख़राब हो जैसे- नीच का हो या- राहू के साथ हो या- सप्तम में हो या- बाहरवे भाव में हो या- अन्य किसी प्रकार से कमजोर अथवा अशुभ फल दे रहा हो तो हम घर बैठे कैसे इसको शांत कर सकते है, इसके निम्न उपाय है :-
1. सूर्य यदि शनि या राहू के साथ हो तो विधिवत रुद्राभिषेक करवाना चहिये। 
2. प्रतिदिन लाल चन्दन एवं केशर मिलकर सूर्य को जल देने से व गायत्रीमंत्र का जाप करना चाहिए। 
3. प्रश्न मार्ग के अनुसार बाधक स्थान में सूर्य होने से शिव एवं भूत के कोप से रोग होते है अतः     इनकी शान्ति जाप करवाकर करवाने चाहिए। स्त्री राशी में सूर्य होने पर माता भगवती की आराधना   करनी चाहिए व हवन एवं दान प्रत्येक अनुष्ठान के अंग है इनको करना चाहिए। 
4. सूर्य को प्रसन्न करने के लिए सूर्योदय के समय जब आधा सूर्य निकले तो लाल पुष्प गिला करके   सूर्य को नियमित अर्ध्य दे। 
5. आत्म बल बढ़ाना हो या धन प्राप्ति की इच्छा हो तो माणिक्य युक्त सूर्य यंत्र सोने में बनवाकर     धारण करे। 



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